रे मन, धैर्य रखो। भगवान सब जीव की सुध लेते हैं, तुम्हारी भी लेंगे। जब तुम नौ मास गर्भ में थे, तब भगवान ही रक्षा कर रहे थे। फिर अब वह तुम्हें कैसे भूल सकते हैं ?
अतएव मूर्खता छोड़कर भगवान को प्रसन्न करो, वे सब प्राणियों के आत्मा हैं, इससे उनको प्रसन्न करना और पाना कुछ भी बड़ई बात नहीं है।
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